20 वी शताब्दी में छत्तीसगढ़ की भू.राजस्व नीति
डा. शबनूर सिद्दीकी
प्राद्यापक इतिहास शासण् पंण्श्यामाचरण शुक्ल महाविद्यालय धरसींवा छण्गण्द्ध
अतीत से ही हिंदुस्तान के ह्दय स्थल प्रदेश के दक्षिण पूर्वी भू.भाग पर स्थित छण्गण् का एक विशिष्ट ऐतिहासिक और सास्कृतिक महत्व रहा है द्य वैभव सम्पन्नताए सुख शांति प्राचीन सुप्रशासन के घोतक रहे है द्य
20 वी शताब्दी , छत्तीसगढ़ की भू.राजस्व नीति
आज का छण्गण् व्यतीत काल में दक्षिण कोसल महाकोसल महाकांतरए दंडकारण्य आदि नामो से अभिहित क्षेत्र से संबंध रहा है द्य प्रागेतिहसिक वैदिकए मौर्य गुप्तए राजपूत कलचुरीए गोड़ मराठा आदि युगों में यहा समयानुसार परिवर्तन होता रहा है द्य 1ण्
कृषि प्रधानता पूर्ण छत्तीसगढ़ की समृद्धि में भूराजस्व व्यवसाय से निरन्तर उतार चढ़ाव आते रहे कृषि की मौजूदा परिस्थितियों ने राजस्व निर्धारण की परम्परा प्रारंभ की और सबसे बड़ा परिवर्तन अकाल के दिनों में कर निर्धारण से पड़ा द्य
कालीदास ने प्राचीन भारत में राजा दिलीप की कर वसूली के औचित्य के संबंध में ष् रघुवंश ष् में कहा है कि जिस प्रकार सूर्य हजार गुना ; बढ़ा कर फिर द्ध देने की लिए ही ; पृथ्वी के द्ध रसो को खीचता है उसी प्रकार राजा दिलीप प्रजा की कल्याण के लिए ही उनसे कर ; मालगुजारी द्ध लेता है द्य 2ण्
अंग्रेज़ अधीक्षक मिण् ऐग्न्यू ने लगान निर्धारण का आधार किसानो की आर्थिक स्थिथि एवं उनकी जमीन से होने वाली उपज को बनाया द्य 3ण्
जमीन की स्थिति के अनुसार भूमिकर उपज का 1ध्4 से 1ध्3 भाग होता था एवं यह अनुपात समय की अनुकूलता या प्रतिकूलता के साथ साथ परिवर्तन होता रहता था चूंकि छण्गण् के लोग विशिष्ट नियम के स्थान पर सर्वमान्य नियम को मानने की प्रकृति से थे अतरू पहली बार गाँव के गौटिया को राजस्व वसूल कराकर सरकारी खजाने में जमा करने का उत्तरदायित्व सौपा गया द्य मराठो के बाद जब छण्गण् का शासन अंग्रेजो के सरंक्षण में आया तब उस संरक्षण अवधि के दौरान जमा राजस्व की कुल राशि 3ए31ए470 रूपये थी द्य 4ण्
1860 में उत्तरी भारत में भीषण अकाल पड़ा लार्ड केनिग भारत का तत्कालीन गर्वनर और वायसराय ने अकाल के कारण और निराकरण के उपायों की जांच हेतु कर्नल बीयर्ड स्मिथ की नियुक्ति की द्य कर्नल स्मिथ में जांच के उपरान्त स्पष्ट किया कि अकाल देश में खाद्य सामग्री की कमी के कारण नहीं वरन उसे प्राप्त करने की कठिनाई की कारण था द्य उन्होंने दूसरी बात यह कही कि लोगो को ऐसी स्थितियों का मुकाबला करने की शक्ति उस भू.प्रणाली पर अधिक निर्भर करती है जिसके आधार पर वे अपना जीवन निर्वाह करते है द्य 5ण्
कर्नल स्मिथ ने भविष्य के पड़ने वाले अकालो की भीषणता से देश को बचाने एवं जनसामान्य की समृद्धि हेतु जमीन के स्थायी बंदोबस्त की सिफारिश की द्य इस संबंध में वित्त सदस्य सर सेमुअल लैंग की टिप्पणी अत्यंत महत्वपूर्ण है उन्होंने कहा कि यदि हम स्थायी बंदोबस्त मिण् बियर्ड के प्रस्ताव के अनुसार लेंगे तो एक ऐसी सामाजिक दशा की आधारशिला रखेंगे जो व्यवस्था में कुछ कठिन होने के बाद भी सभ्य एवं प्रगतिशील तत्वों से मुक्त होगी द्य इस टिप्पणी से भारत सचिव सर चाल्स वुड की परिषद् के सदस्य जान लारेंस भी सहमत थे द्य 6ण्
स्थाई बंदोबस्त पर विचार विमर्श कई वर्षो तक चला और इसी बीच मध्य प्रदेश में नया बंदोबस्त प्रारंभ कर दिया गया वहा प्रान्तीय सरकार द्वारा बंदोबस्त की घोषणा 1854 में कर दी गई और 1861 में बंदोबस्त प्रारंभ कर दिया गया द्यण्7
प्रथम बंदोबस्त की मियाद 1888 में खतम हो गई द्य दूसरा बंदोबस्त केरी साहब ने शुरु किया इसी बीच उनकी बदली हो गई अतरू राय बहादुर पुरुषोत्तम दास को काम पूरा करना पड़ा द्य 20 वर्ष की अवधि में कृषि विस्तार बहुत अधिक हो गया था एवं जोन जमीन 9ए79ए160 एकड़ से बढकर 1ए42ए436 एकड़ तक पहुच गई द्य लगान में भी वृद्धि हो चुकी थी द्य
रायपुर जिले का दूसरा बंदोबस्त 1889 में किया गया द्य बंदोबस्त अधिकारी मिण्फुलर द्वारा निर्मित श् भू.वर्गीकरण प्रणाली श् के आधार पर बंदोबस्त के परिणाम स्वरूप काश्तधारो के लगान में 14ः की वृद्धि हुई द्य इस तरह राजस्व वृद्धि की तुलना के 76ः अर्थात् 2ए32ए378ए रूपये की वृद्धि हुई द्यइस व्यवस्था के परिणाम स्वरुप मालगुजारो के द्वारा नजराना लेने की प्रथा का जन्म हुआ द्य शक्तिशाली मालगुजार अपने काश्तकारो से शादी ब्याह तीर्थ यात्रा आदि के अवसर पर नियमित राशि वसूल करते थे द्य 8ण्
तीसरे बंदोबस्त का समय 1899 से 1902 तक निर्धारित किया गया मिण्जेण्आरण्स्टाट ने रायपुर की पुरानी जमीदारियो का बंदोबस्त किया इस दौरान पड़ने वाले अकाल के बावजूद जमीदारियो की संख्या में वृद्धि होती गई क्यों कि आवागमन के साधनों के विस्तार के कारण खालसा क्षेत्र के लोग यहाँ बसते रहे द्य 1897 से 1900 तक के बीच के पड़ने वाले अकालो का भी ध्यान रखा गया तथा मौजूदा आय की जानकरी के अनुसार श् कामिल जमा श् तथा टकोली निश्चित किया गया द्य कामिल जमा मालगुजारी दर से पटाए जाने वाली जमा थी जिसका कुछ प्रतिशत टकोली के रूप में ;लगान 60ःद्ध निश्चित हुआ था द्य
इमारती लकड़ी की मांग बढ़ जाने के कारण जंगलो का दोहन प्रारंभ हुआ अतरू टकोली में वृद्धि होने लगी द्य यह टकोली प्रथम बंदोबस्त में 6450 रुण् थी जो दुसरे बंदोबस्त में बढकर 32700 रुण् हो गई द्य बाद में जमीदारो द्वारा पटाए जाने वाले पुलिस व्यव को भी निश्चित किया गया द्य
अगला बंदोबस्त 1918 में तय हुआ द्य फुलझर जमीदारो का राजस्व अभ्यु 1909 में 15000 तय हुआ द्य यह बंदोबस्त 20 वर्ष के लिए था द्य 10ण्
1917 से 1920 के भू.राजस्व तथा काश्तकारी कानून के अनुसार जमीदारी क्षेत्र में कई परिवर्तन हुए अब जमीदारी जंगल महाल की अन्यथा समाप्त हो गई तथा जमीदारी के सब जंगल सामान्य मालगुजारी जंगल नियम के अंतर्गत आ गए द्य अब इन पर शासन का कठोर नियत्रण स्थापित हो गया द्य
राजस्व पटाने की विधि दृ मालगुजारी प्राप्त किसी गौटिया को यह जमीदारी दी गई वह सम्पूर्ण राजस्व को एकत्र कर उसे शासन को पटाए द्य इस कार्य को करने वाला नम्बरदार कहा गया जिसे पारिश्रमिक के रूप में अतिरिक्त रूप से कुछ नहीं दिया जाता था द्य 15 अगस्त 1947 को देश विदेशीसत्ता से मुक्त हुआ एवं 31 मार्च 1951 से यह नम्बरदारी प्रणाली समाप्त हो गई द्य
संदर्भ दृ
1ण् रमेन्द्रनाथ मिश्र ब्रिटिश कालीन छण्गण् का प्रशासनिक इतिहास 1981 पृण्1
2ण् कालीदास रघुवंश प्रथम वर्ग 18
3ण् मेजर पी वान्स एग्न्यू श्रिपोर्ट आन दि सूबा आफ छतीसगढ़श् 18.0 पृण्23
4ण् रायपुर जिला राजेटियर 1909 पैरा क्रमांक 195 पृण्218
5ण् रोमेश उत्त ष्दि इकोनामिक हिस्ट्री आफ इंडिया इन विक्टोरियन एज खण्ड प्प् दृ 1903ष् पृण्274
6ण् वही पृण्. 281
7ण् वही पृण्. 304
8ण् रायपुर डिस्ट्रिक्ट गजेटियर 1973 पृण् 316
9ण् वेडेन पावेल श्द लैंड सिस्टम आफ ब्रिटिश इंडियाश् खण्ड प्प् 1882 पृण् 486
10ण् रायपुर डिस्ट्रिक्ट गजेटियर 1973 पृण्319 दृ 320
11ण् वही पृण्321
Received on 18.07.2017 Modified on 14.08.2017
Accepted on 10.09.2017 © A&V Publication all right reserved
Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2017; 5(3): 152-154 .